जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था वो। मैं घंटों से इसके अस्पताल( सर्विस सेंटर) के बाहर इस इंतजार में बैठा रहा कि डॉक्टर(मैकेनिक) अच्छी खबर लेकर बाहर आएंगे। मेरी निगाहें अस्पताल की उस हरी और लाल बत्ती (काल्पनिक) से हटने का नाम नहीं ले रही थी। दिल की धड़कनें काफी तेज गति से धक-धक, धक-धक कर
रही थी। हादसा बेहद खतरनाक हुआ था। दिल( मदरबोर्ड) पर चोटें आई थी। आस-पास
के सभी डॉक्टर्स ने लाल बत्ती जला दी थी। दूर-दूर तक कोई आश नजर नहीं आ
रहा था। पर मेरे जेहन में उसे बचाने की जिद थी। उसे बचाना है, अपने-आप में
ठान रखा था। आखिर छह साल का खून का संबंध तो नहीं पर दिल का मजबूत रिस्ता
था उससे। बहुत ही लाड-प्यार से रखा था उसे। पांच-पांच सेकेंड पर ऑपरेशन रूम
का खुलता दरवाजा मुझमें उम्मीद जगा रहा था कि कुछ अच्छी खबर सुना जाए कोई।
काश ऐसा होता जाको राखे साइयां मार सके न कोय...पर होनी को कौन टाल सकता
है। डॉक्टर बाहर आए और हमेशा की तरह बोल पड़े “आई एम सॉरी, मैं इसे बचा नहीं पाया। कोई नया दोस्त बना लो, बाजार में तो गजब-गजब के दोस्त मिल रहे हैं आज कल।" सुनकर एक पल के लिए खुशी हुई, यह सोचकर कि चलो अब नया दोस्त आएगा जिंदगी में। पर छह साल तक उसके साथ गुजारे हर पल, हर लम्हे की तुलना में नए दोस्त बनाने की खुशी कहीं कमजोर मालूम पड़ रही थी। भला कौन इतने दिनों तक साथ देता है आज कल। बड़े ही दुख (इतना दुख कभी नहीं हुआ) के साथ कहना पड़ रहा है कि मेरे प्रिय दोस्त जो कि पिछले छह साल से हरदम मेरे सुख-दुख का साथी रहा, आज उसका स्वर्गवास हो गया। माफ करना मेरे दोस्त मैं तुम्हें बचा नहीं पाया। अपने खून का एक-एक कतरा तुझे देने को तैयार था पर कम्बख्त डॉक्टरों नें कहा तुम्हारा खून इलेक्ट्रिक नहीं है। गरमी हो, बरसात हो या हार्ड कंपाने वाली सर्दी हो सदा साथ निभाया। हर एक चौराहे के साथ दोस्त बदल जाने के जमाने में तुमने छह साल तक हमेशा साथ दिया, मैं तहे दिल से उसका शुक्र-गुजार हूं। तेरी यादें इतनी है कि मैं बयां नहीं कर सकता। मैं तुम्हें दफनाउंगा नहीं मेरे दोस्त। तेरी यादों का ताजमहल मेरे घर के ही किसी कोने में बनाउंगा। हमारी दोस्ती की मिशाल, अगले दोस्त को जरूर बताउंगा कि तुम चार दिन में पों-पों करने लगे, इधर देखो इसे, छह साल तक कभी रोया नहीं।
अलविदा मेरे दोस्त( सैमसंग S5233)