महंगाई आसमान छू रही हो, भ्रष्टाचार चरम पर हो, अपराध प्रशासन के नियंत्रण से बाहर हो, राजनीतिक समीकरण बन-बिगड़ रहा हो और जनता के पास लाचारी से जीने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं। ऐसे मे आम चुनाव साल भर दूर हो और चुनावी चहल-पहल सर चढ़ कर बोलने लगे तो कोई आश्चर्य़ की बात नहीं। जी हां हम बात कर रहे हैं 2014 आम चुनाव की। आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो चुका है। सभी नेता एक दूसरे पर कटाक्ष करने मे लगे हुए हैं। लोगों को भ्रम है कि कौन सही है और कौन गलत। जनता मे भारी गुस्सा है और वह बदलाव चाह रही है। जनता अपने-आप को कोस पाने से नही रोक पा रही है कि जिन्हे अपना प्रतिनिधि चुन संसद मे भेजते हैं वही जनता को भूल जाता है। ऐसे मे चुने तो चुने किसे ? नरेन्र्द मोदी, एक ऐसा नाम जिनके नाम से गुजरात के साथ पूरे भारत के लोगों के सामने भविष्य की एक नई उम्मीद और आशा की किरण दिखाई देने लगती है। पिछले कुछ सालों मे जिस रफ्तार से महंगाई, भ्रष्टाचार, अपराध जैसे मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है, लोगों की रुझान और विश्वास भी सरकार से काफी हद तक गिरा है। पिछले दिनो लगातार तीसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने नरेन्र्द मोदी को अब लोग दिल्ली के गलियारे से जोड़ कर देखने लगे हैं। इसका सामाजिक आकलन इस बात से लगाया जा सकता है, आज आमतौर पर हर गली-चौराहेों मे मोदी की गूँज साफ सुनाई दे रही है। आए दिनो समाचार चैनलों और अखबारों मे हुए सर्वे की माने तो इसमे भी नरेन्र्द मोदी अपने कथित प्रतिव्दंदी राहुल गांधी और अन्य के मुकाबले काफी आगे माने जा रहे हैं। भले ही भारतीय जनता पार्टी ने अपने भावी पीएम उम्मीद्वार के नाम की घोषणा अभी तक नहीं की हो पर लोगों को अपने आगामी पीएम की तस्वीर साफ नजर आने लगी है। पिछले दिनों नरेन्र्द मोदी का दिल्ली आना और राजनाथ सिंह से मुलाकात करना, लोगों के सामने कई सवाल छोड गए। दिल्ली के विख्यात श्रीराम काँलेज मे मोदी के आगमन पर पूरी मीडिया जगत के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियों की भी कड़ी नजर थी। पूरे देश भर मे उनके घंटे भर के भाषण की खूब सराहना की गई। वहां मौजूद छात्रों के जोश और उमंग को देखकर देश भर मे मोदी के प्रति विश्वास की किरण नहीं फैली होगी, इसे नकारा नही जा सकता। आम लोगों की बात तो दूर, मोदी के भाषण की प्रतिक्रिया के लिए कांग्रेस के किसी नेताओं के पास भी सटीक सा जवाब नही था। तकनीक का विकास हुआ है, समय बदला है, सोंच बदली है पर आज भी देश की बड़ी आबादी इस बदलाव से अंजान है। और ऐसे आम लोगों के व्दार पहुंच उनका विश्वास जीतना मोदी को भली-भांती आता है। जिस मॉडल और गति के आधार पर मोदी ने गुजरात का चहुंमूखी विकास किया है, पूरे भारतवासियों की उम्मीदें नरेन्र्द मोदी पर टिकी जरुर है। नरेन्र्द मोदी और गुजरात के विकास की गुणगान भारत समेत पूरे विश्व भर मे हो रही है इसमे कोई संदेह नहीं, पर भाजपा के लिए सबसे ब़डी चुनौती यह है कि आपसी मतभेदों और बयानबाजी से बचना होगा। एक ओर जहां कांग्रेस महंगाई, भ्रष्टाचार, अपराध पर अंकुश लगा पाने में सफल नही हो पा रही है वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी विपक्ष मे होने का पूरा फायदा नहीं उठा पाई है। जिस तरह से पिछले कुछ महीनो मे सरकार के खिलाफ एक से बढ़कर एक घोटालों का उजागर हुआ, विपक्ष के पास अच्छा मौका था उन मुद्दों को आम जनता के समक्ष लाकर उनका विश्वास जीतने का। लेकिन अफसोस कि बीजेपी इस सुनहरे अवसर को चूक गई और अपने आपसी मुद्दों, मतभेदों मे ही छाए रहे। मोदी की जीत ने कुछ हद तक भाजपा की मुश्किलों को कम जरूर कर दिया है पर सवाल ये है कि भाजपा अपने सहयोगी पार्टियों से तालमेल बना पाती है या नही ? अटकलें ये भी लगाई जाने लगी थी कि इतिहास बदलेगा और किसी तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी पर ये किसी कल्पना से कम नहीं। उधर आडवाणी ने यह बयान देकर मामला और भी गर्म कर दिया कि अगले पीएम न कांग्रेस के होंगे न ही बीजेपी की। अब देखना दिलचस्प होगा कि 2014 का ताज किसके सर बंधता है ? बीजेपी हो या कांग्रेस 2014 का चुनाव दोनो के लिए आर या पार के तौर पर देखें तो कोई गलत नहीं होगा।

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