आज वही चेहरा फिर मेरी आंखों के सामने मंडरा
रहा है जिसने सालों पहले मुझ गरीब को छोड़ किसी अमीर अपने के साथ चलने का फैसला
किया था। मजबूरी थी या मुझे गरीब साबित करने की ढोंग ये तो खुदा भी नहीं जान पाया
होगा। एक्टिंग ऐसी कि वो सूरज को तारा कह दे तो आप दिन को भी रात मान बैठें। खेल
तो लोग मैदान में हूनर से खेलते हैं कोई घर बैठे आंखों और अदाओं से खेले तो सामने
वाले की हार पक्की। उस खेल का हारा था मैं। आज सालों बाद जब उस अमीरी ख्वाहिश वाली
मोहतरमा का फोन आया तो थोड़ी देर के लिए सहम गया, कौन सा खेल बाकी
रह गया था पता नहीं। न जाने क्यों फूट-फूटकर रो रही थी। वो कुछ बताती उससे पहले
मेरे लगाए कयास सही लगने लगे थे। उस अमीर शख्स से उसकी लड़ाई हुई थी और दोनो
एक-दूसरे से अलग होने का फैसला कर चुके थे। मुझे मालूम था उसे एक न एक दिन एहसास
जरुर होगा कि प्रपोज भले ही मैंने ठीक से न किया हो पर बंदा चाहता बेजोड़ था। उसने
मेरी फीलींग्स का मजाक जरुर बना दिया था, उस शख्स के
सामने जिससे मोहतरमा अलग होने का फैसला की है, जिसकी मकान मेरे
मकान से 5 गुनी थी। माना कि दौलत के तराजू में फकीर थे हम पर दिले-वफा में तौल पाओ
वो तराजू आया नहीं। क्या उस अमीर शख्स का मकान गिर गया या उसने दिल के किरायेदार
को बदल दिया? आज तुम उसी
सीढ़ी में खड़ी हो जहां पर सालों पहले मैं गिरा था। आज खुशी मेरे पास है। औकात और
हवेली देखकर मोहब्बत करने वालों भले ही तुम चार दिन हाथ में हाथ रख डिस्को में उछल
लो पर गांव वाली गरीब काकी जैसी तुम्हारी किस्मत कहां जिसे शादी के 18 साल बाद भी
5 रु के ही सही पर काका के हाथों सुबह शाम मनपसंद चॉकलेट मिलता हो। इस प्यार का
तुम्हारे अमीरी शौक से कोई तुलना नहीं। वरन ऐसे शौक पांच-पांच शादियां करने वाले
शवेता तिवारी और राजा चौधरी जैसे लोग पालते हैं जिसे मै मोहब्बत हरगिज नहीं मानता।
हां मैं उसे तुम्हारा शौक कहता हूं, प्यार कतई नहीं।
दिखावे की मोहब्बत से बेहतर है आप नफरत करो हमसे, हम सच्चे जज्बातों
की बहुत कद्र करते हैं।

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