ऑटोवाला भाई
क्या कहना चाहता है...? इसका राज क्या है? राज
की गहराई को मापने के लिए मैंने मज़बूत रस्सी फेंकी। पहले तो
पूछते ही वो शर्मा गया और 30 सेकंड तक
मुस्कुराता रहा जैसे कि उसे जिंदगी का कोई हसीन वाला पल याद आ गया हो। शर्माते
हुए मैंने भी फिर पूछा...कुछ तो बात है भाई...! फिर वो ऑटो स्टार्ट किया
और खुलने लगा परत दर परत उस बेवफा यार का राज........ बचपन में बनारस के
एक गांव के स्कूल में एक लड़की को बेइम्तिहां मोहब्बत करता था शिवराज। टूट
कर चाहता था। नाम क्या था भाई मैडम का...!
नीलू... नीलू नाम था दोस्त। बहुत सुंदर नाम है भाई, नाम इतना सुंदर तो
चेहरा कितना हसीन होगा भाई...! वो मोबाइल निकाला और स्क्रीन दिखाया... अच्छा
तो ये हैं मैम नीलू। बहुत सुंदर है भाई। अच्छा आगे बता भाई... हुआ क्या? आठवीं क्लास से
दसवीं तक दोनों छिप छिपकर मिलते रहे, कसमे वादे निभाने
के वादे करते रहे। सात जन्मों तक साथ जीने मरने की कसमे खाने लगे। प्यार
का परवान चढ़ता गया। मिलते जुलते दसवीं पास कर गए। फिर नीलू के घर उसकी
शादी की बात होने लगी। नीलू ने शिवराज से शादी करने की बात घरवालों को बताई।
घरवालों ने नीलू की यह बात सुनकर कि वह अपनी पसंद के किसी लड़के से शादी
करना चाहती है...जमकर डांट फटकार लगाई और शिवराज को भुलाकर एक दूसरे लड़के
के साथ शादी के लिए तैयार हो जाने की चेतावनी दी। नीलू ने वो गुनाह कर
दिया था जो हम जैसे दिलवालों के लिए बेगुनाह थी लेकिन छोटे कस्बे और गांव
की समाज के लिए घोर अपराध। इन सबके बीच अब नीलू के लिए जिंदगी का सबसे कठिन
फैसला लेने का वक्त था। घरवालों की सुने या अपने दिल की। दिमाग की सुने
तो दिल घायल हो जाएगा और दिल की सुने तो परिवार। इधर या उधर, चुनना एक को
ही है, लेकिन दिल दोनों को मना करने की इजाजत नहीं
देता। घरवालों से समाज जुड़ा है तो मोहब्बत से खुशियां। जाएं तो
जाएं किधर? परिवार-समाज को ठुकराकर
हम दिलवालों का दिल तो नीलू जीत सकती थी लेकिन घरवालों से सदा के लिए
हार जाती। इन सबके बीच रिश्ते की तराजू में घरवालों का वजन ज्यादा हुआ और
नीलू ने अपने मोहब्बत, अपनी खुशी की कुर्बानी देकर शिवराज से दूर हो जाने
का फैसला किया। तब से शिवराज के दिल में उसके लिए संजोई वफाई बेवफाई में
बदल गई। शिवराज को ये मजबूरी बेवफ़ाई लगी और वह उसके आस पास बनारस में भी
नहीं रह सका। एक साल से वह नोएडा में ऑटो चलाता है और दिल में छपे दाग को
ऑटे के पीछे उतारकर याद करता रहता है। उधर नीलू की शादी दूसरे लड़के के साथ
कर दी गई है, खुश है या नहीं, कोई मायने नहीं
रखता। लेकिन शिवराज की नजर में वो मजबूर नीलू हमेशा के लिए बेवफा यार
बन गई है।Thursday, May 12, 2016
ऑटोवाले भाई.. बेवफायार की राज तो बता
ऑटोवाला भाई
क्या कहना चाहता है...? इसका राज क्या है? राज
की गहराई को मापने के लिए मैंने मज़बूत रस्सी फेंकी। पहले तो
पूछते ही वो शर्मा गया और 30 सेकंड तक
मुस्कुराता रहा जैसे कि उसे जिंदगी का कोई हसीन वाला पल याद आ गया हो। शर्माते
हुए मैंने भी फिर पूछा...कुछ तो बात है भाई...! फिर वो ऑटो स्टार्ट किया
और खुलने लगा परत दर परत उस बेवफा यार का राज........ बचपन में बनारस के
एक गांव के स्कूल में एक लड़की को बेइम्तिहां मोहब्बत करता था शिवराज। टूट
कर चाहता था। नाम क्या था भाई मैडम का...!
नीलू... नीलू नाम था दोस्त। बहुत सुंदर नाम है भाई, नाम इतना सुंदर तो
चेहरा कितना हसीन होगा भाई...! वो मोबाइल निकाला और स्क्रीन दिखाया... अच्छा
तो ये हैं मैम नीलू। बहुत सुंदर है भाई। अच्छा आगे बता भाई... हुआ क्या? आठवीं क्लास से
दसवीं तक दोनों छिप छिपकर मिलते रहे, कसमे वादे निभाने
के वादे करते रहे। सात जन्मों तक साथ जीने मरने की कसमे खाने लगे। प्यार
का परवान चढ़ता गया। मिलते जुलते दसवीं पास कर गए। फिर नीलू के घर उसकी
शादी की बात होने लगी। नीलू ने शिवराज से शादी करने की बात घरवालों को बताई।
घरवालों ने नीलू की यह बात सुनकर कि वह अपनी पसंद के किसी लड़के से शादी
करना चाहती है...जमकर डांट फटकार लगाई और शिवराज को भुलाकर एक दूसरे लड़के
के साथ शादी के लिए तैयार हो जाने की चेतावनी दी। नीलू ने वो गुनाह कर
दिया था जो हम जैसे दिलवालों के लिए बेगुनाह थी लेकिन छोटे कस्बे और गांव
की समाज के लिए घोर अपराध। इन सबके बीच अब नीलू के लिए जिंदगी का सबसे कठिन
फैसला लेने का वक्त था। घरवालों की सुने या अपने दिल की। दिमाग की सुने
तो दिल घायल हो जाएगा और दिल की सुने तो परिवार। इधर या उधर, चुनना एक को
ही है, लेकिन दिल दोनों को मना करने की इजाजत नहीं
देता। घरवालों से समाज जुड़ा है तो मोहब्बत से खुशियां। जाएं तो
जाएं किधर? परिवार-समाज को ठुकराकर
हम दिलवालों का दिल तो नीलू जीत सकती थी लेकिन घरवालों से सदा के लिए
हार जाती। इन सबके बीच रिश्ते की तराजू में घरवालों का वजन ज्यादा हुआ और
नीलू ने अपने मोहब्बत, अपनी खुशी की कुर्बानी देकर शिवराज से दूर हो जाने
का फैसला किया। तब से शिवराज के दिल में उसके लिए संजोई वफाई बेवफाई में
बदल गई। शिवराज को ये मजबूरी बेवफ़ाई लगी और वह उसके आस पास बनारस में भी
नहीं रह सका। एक साल से वह नोएडा में ऑटो चलाता है और दिल में छपे दाग को
ऑटे के पीछे उतारकर याद करता रहता है। उधर नीलू की शादी दूसरे लड़के के साथ
कर दी गई है, खुश है या नहीं, कोई मायने नहीं
रखता। लेकिन शिवराज की नजर में वो मजबूर नीलू हमेशा के लिए बेवफा यार
बन गई है।
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